शासन में सुधार कैसे हो?
संजय धाकड़ सुप्रीम कोर्ट के अनुसार कानून बदलें, तो सुधरे गवर्नेंस विराग गुप्ता, ( सुप्रीम कोर्ट के वकील ) भारत की राजधानी दिल्ली संवैधानिक दृष्टि से सीमित अधिकारों वाला राज्य है। यहां पर विधानसभा और सरकार के अधिकारों में अंकुश लगाने के लिए संसद में बिल पेश करने के बाद सियासी तापमान बढ़ गया है। प्रस्तावित कानून के अनेक प्रावधानों पर तीखा विवाद होने के बावजूद दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के तीन साल पुराने फैसले पर एकमत दिखते हैं। दो पेज के इस NCT बिल के साथ दिए गए उद्देश्य को शब्दशः माना जाए तो नए कानून से सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बेहतर अमल होने के साथ राज्य और केंद्र के बीच सद्भाव बढ़ेगा। संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सुप्रीम कोर्ट के फैसले देश का कानून माने जाते हैं, लेकिन कानून बनाने का हक सिर्फ संसद और विधानसभाओं को है। इसलिए कानून का माना जाना और कानून के होने में काफी फर्क है। पिछले कुछ सालों में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता, व्यभिचार और आईटी एक्ट की धारा 66 ए को रद्द करने जैसे कई बड़े फैसले दिए हैं। इन फैसलों को स्वीकार करने के बावजूद, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फ...