Posts

Showing posts from April, 2021

लोकपाल अधिमियम 2013

संजय धाकड़ क्या हैं लोकपाल और लोकायुक्त? लोकपाल तथा लोकायुक्त अधिनियम, 2013 ने संघ (केंद्र) के लिये लोकपाल और राज्यों के लिये लोकायुक्त संस्था की व्यवस्था की। ये संस्थाएँ बिना किसी संवैधानिक दर्जे वाले वैधानिक निकाय हैं। ये  Ombudsman  का कार्य करते हैं और कुछ निश्चित श्रेणी के सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच करते हैं। हमें ऐसी संस्थाओं की आवश्यकता क्यों है? खराब प्रशासन दीमक की तरह है जो धीरे-धीरे किसी राष्ट्र की नींव को खोखला करता है तथा प्रशासन को अपने कार्य पूर्ण करने में बाधा डालता है। भ्रष्टाचार इस समस्या की जड़ है। अधिकतर भ्रष्टाचार निरोधी संस्थाएँ पूर्णतः स्वतंत्र नहीं हैं। यहाँ तक कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी CBI को ‘पिंजरे का तोता’ और ‘अपने मालिक की आवाज़’ बताया है। इनमें से कई एजेंसियाँ नाममात्र शक्तियों वाले केवल परामर्शी निकाय हैं और उनकी सलाह का शायद ही अनुसरण किया जाता है। इसके अलावा आंतरिक पारदर्शिता और जवाबदेही की भी समस्या है, क्योंकि इन एजेंसियों पर नज़र रखने के लिये अलग से कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। इस संदर्भ में, एक स्वतंत्र लोक...

वैश्वीकरण उत्तर लेखन

संजय धाकड़ भूमंडलीकरण से आप क्या समझते हैं? भारतीय समाज को इसने किस प्रकार प्रभावित किया है ? चर्चा करें। 02 Feb, 2018   सामान्य अध्ययन पेपर 1  भारतीय समाज उत्तर  : उत्तर  की रूपरेखा: भूमंडलीकरण को संक्षेप में समझाएँ।  भारतीय समाज पर भूमंडलीकरण के  प्रभावों  को  बताएँ।  भूमंडलीकरण एक परिघटना न होकर एक ‘प्रक्रिया’ है, जो क्रमशः एवं चरणबद्ध तरीके से वैश्विक समुदाय को एकीकृत करने का प्रयास कर रही है। यह प्रक्रिया उतनी ही पुरानी है, जितनी मानव सभ्यता। हालांकि संकल्पना के रूप में शब्द की चर्चा विश्व युद्ध के  बाद के काल में हुई,  लेकिन सिंधु घाटी सभ्यता एवं सुमेरियाई सभ्यता के बीच व्यापारिक संबंध इसकी प्राचीनता की ओर इशारा करते हैं। आधुनिक समय में संकल्पना 1960 के दशक से चर्चा में आए जब कैनेडियाई साहित्य के आलोचक मार्शल लोहान ने वैश्विक ग्राम शब्द को लोकप्रिय बनाया था। तकनीक के बढ़ने के साथ ही यह प्रक्रिया और तीव्र होती गई,  लेकिन  शीत युद्ध के माहौल ने इसकी रफ्तार मंद रखी। 1991 में  सोवियत  संघ  के विघटन तथा भार...