भूमि अधिग्रहण सिविल सेवा परीक्षा
संजय धाकड़ भूमि अधिग्रहण और अनुच्छेद 300A 20 Feb 2020 20 min read टैग्स: सामान्य अध्ययन-II निर्णय और मामले न्यायतंत्र न्यायाधिकरण भारतीय संविधान संदर्भ हाल ही में भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि “राज्य द्वारा उचित न्यायिक प्रक्रिया का पालन किये बिना नागरिकों को उनकी निजी संपत्ति से ज़बरन वंचित करना मानवाधिकार और संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत प्राप्त संवैधानिक अधिकार का भी उल्लंघन होगा।” सर्वोच्च न्यायालय के मुताबिक, कानून से शासित किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य कानून की अनुमति के बिना नागरिकों से उनकी संपत्ति नही छीन सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि कानून से संचालित कल्याणकारी सरकार होने के नाते सरकार संवैधानिक सीमा से परे नहीं जा सकती। विद्या देवी बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार व अन्य’ मामला: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 1967-68 में सड़क निर्माण के दौरान विद्या देवी नामक एक निरक्षर महिला की ज़मीन बिना उसकी अनुमति के अधिगृहीत कर ली गई थी। सर्वोच्च न्यायलय ने ‘विद्या देवी बनाम हिमाचल प्रदेश ...