संस्कृत श्लोक

संजय धाकड़

·        असतो मा सदगमय ।

 तमसो मा ज्योतिर्गमय। 

मृत्त्योर्मामृत‌ं गमय।।


·        कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती।

   कर मूले तु गोविंद: प्रभाते कर दर्शनम्।।


·        कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

 मां कर्मफल हेतुरभूर्मा ते संगो स्वत्कर्मणि।।

 


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